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महिला मरीज की जान बचाने के लिए रितेश ने किया अपने जीवन का 79 बार किया रक्तदान

झुमरी तिलैया। आज भले हीं विज्ञान कितना हीं तरक्की कर लिया हो, पर आज भी अगर किसी मरीज के शरीर में रक्त की भरी कमी पड़ जाती है तो उसके लिए किसी इंसान को आगे आ कर इन मरीज के लिए अपना रक्तदान करते हैं। रक्त की कमी पीडीएनई पर वर्तमान में विज्ञान के पास रक्तदान के अलावा दूसरा कोई और चारा अब तक नहीं बन सका है। इसी कड़ी में बुधवार को कोडरमा जिले के डोंईयां की रहने वाली हीं एक गर्भवती महिला मरीज के लिए A पॉजिटिव रक्त की आवश्यक्ता आन पड़ी, पर ब्लड बैंक में A पॉजिटिव रक्त नहीं रहने की वजह से उक्त आरिज के परिजन काफी परेशान थें। जिसकी सूचना मिलते हीं उक्त महिला मरीज के लिए रक्त मुहैया करवाने के लिए कोडरमा जिले के समाजसेवी रक्तदाता रितेश माधव जी ने अपना रक्त उक्त मरीज को मुहैया करने की बात उक्त मरीज के परिजनों को कही। जिसके बाद रितेश माधव ने उक्त मरीज के लिए रक्त मुहैया करने के लिए सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक पहुंच कर अपना रक्त उक्त मरीज के लिए दान किया। इस रक्तदान के साथ यह रक्तदान रितेश माधव के लिए 79वा रक्तदान रहा। रितेश माधव ने बताया की आज कोडरमा ब्लड बैंक हर रोज कई मरीजों की जान निशुल्क बचा रही है, अगर ब्लड बैंक में आपकी जरूरत के निसार रक्त ब्लड बैंक में है तो आपको सिर्फ उस रक्त के बदले दूसरा किसी भी ग्रुप का रक्त दे कर आप वह ग्रुप का रक्त ले सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में रक्तदान के प्रति लोगों में काफी भ्रमिकताएं फैली हुई है। लोग सोचते हैं कि रक्तदान करने से उनको कमजोरी या कोई अन्य परेशानियां हो सकती है पर रक्तदान करने से इस भ्रमिकता के ठीक विपरीत उत्तर मिलता है। रक्तदान करने से लोगों के भीतर नई रक्त कोशिकाएं बनती है, और समय समय पर हमारे शरीर में नई रक्त कोशिकाएं बनता रहता है। रितेश ने बताया की वह पहले स्वयं हाई सुगर के मरीज थें। पर जब से वह रक्तदान करना सुरु किए हैं उनका सुगर काफी कंट्रोल रहता है। रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता की काफी कमी है, जिसके लिए सरकार को रक्तदाताओं के साथ मिल कर इस पर कार्य करना चाहिए।

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