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वैज्ञानिक और क्रांतिकारी भावना का मिलन है मार्क्सवाद : संजय पासवान

150 वीं जयंती पर याद किये गए व्लादिमीर लेनिन

कोडरमा – मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कॉमरेड व्लादिमीर लेनिन की 150 वीं जयंती पर उन्हें याद किया और श्रद्धांजलि दी. लॉक डाउन के कारण अपने आवास पर कॉ० लेनिन के चित्र पर माल्यार्पण और नमन करते हुए सीपीएम के राज्य सचिवमंडल सदस्य संजय पासवान ने कहा कि पूरी दुनिया के मेहनतकश मजदूर वर्ग और सर्वहारा के नेता थे कॉ० लेनिन. मार्क्सवाद के आधार पर वे शोषण समाप्त कर बिना शोषण और बिना वर्गीय भेदभाव के समाजवादी व्यवस्था करना चाहते थे. जिसका सफल प्रयोग कर 1917 के रूसी क्रांति के बाद 30 सालों मे ही रूस मे किया गया. माकपा नेता ने कहा कि क्रांतिकारी और वैज्ञानिक भावना दोनों का मिलन ही मार्क्सवाद है. लेनिन ने कहा था कि ठोस परिस्थितियों का ठोस विश्लेषण के आधार पर ही वास्तविक क्रांति संभव है. चुनौतियों का मुकाबला इसी रास्ते से किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की कॉर्पोरेट परस्त नीतियों के चलते कोरोना के पहले ही भारत की अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुका था. जिसके कारण आज प्रवासी मजदूरों को न खाने, रहने और न ठीक से जिन्दा रहने की व्यवस्था है. महामारी के बाद शोषण और बढ़ेगा, अमीर और अमीर होगा तथा गरीब और गरीब होगा। सरकार के खिलाफ लगातार बढ़ रहा असंतोष कहीं क्रांति का रूप न लेले इसलिए फांसीवादी रुझान के आधार पर धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र का सांप्रदायिकरण किया जा रहा है। इन चुनौतियों का मुकाबला क्रांतिकारी संगठन और व्यापक जनसंघर्ष के द्वारा ही होगा.

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