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बेटी ने दी पिता को मुखाग्नि, निभाया बेटे का फर्ज, मृतक जेजे कॉलेज कर्मी के है तीन बेटियां

झुमरीतिलैया। बेटा नही होने की वजह से एक पिता की मौत के बाद छोटी बेटी समृद्धि ने बेटे का फर्ज निभाया और अंतिम संस्कार कर मुखाग्नि दी। कोडरमा के जे जे कॉलेज के शिक्षकेतर कर्मचारी शैलेन्द्र सिन्हा का निधन 26 फरवरी को हार्ड अटैक होने की वजह से हो गया था। वे अपने पीछे अपनी धर्मपत्नी और तीन बेटियां छोड़ गए है। बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है और वो महाराष्ट्र में बैंक पीओ है। जबकि दो बेटी पिता के साथ ही रहती थी। पिता के निधन से बेटियों और परिवार के सदस्यों पर पहाड़ टूट गया। शैलेन्द्र सिन्हा पिछले कई महीनों से बीमार चल रहे थे, बीमारी की वजह से उनकी सांसे थम गई। मृतक शैलेन्द्र झुमरीतिलैया के विशुनपुर रोड के रहने वाले है और उनका अंतिम संस्कार उनकी छोटी बेटी ने 27 फरवरी को स्थानीय मुक्तिधाम में किया। बताया जाता है कोडरमा जिले में पहला मौका है, जब बेटी ने बेटा बनकर मुखाग्नि दी। शैलेन्द्र सिन्हा का अंतिम संस्कार कोरियाडीह स्थित श्मशान घाट पर किया गया, जहां परिवार समेत करीबी लोगों ने अंतिम दर्शन किया। परिवार में शैलेन्द्र सिन्हा अपनी पत्नी और तीन बेटियों को छोड़ गए है। बेटा बनकर बेटी द्वारा पिता को मुखाग्नि देने की घटना शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुरुषवादी समाज मे मिथक तोड़ अब बेटियां भी बेटा बनकर समाज की बेड़ियों को तोड़कर उदाहरण पेश कर रही है। दुःख की इस घड़ी में बेटियों ने ना अपना फर्ज निभाया, बल्कि समाज को एक संदेश भी दिया कि बेटा हो या बेटी दोनो है एक समान।

कायस्थ समाज व अन्य ने शोक प्रकट कर दी श्रद्धांजलि

कायस्थ समाज के जिलाध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद, कार्यकारी अध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार अभय, जिला महासचिव मनोज सहाय पिंकू, जिला प्रवक्ता शैलेश कुमार शोलु, कोषाध्यक्ष बिपिन कु सिन्हा, बिनय कु सिन्हा, हेमा सिन्हा, प्रीति सिन्हा, अजित सिन्हा, रणजीत सिन्हा, आर्यन श्रीवास्तव, मांस सिन्हा, हर्षित सिन्हा के अलावा समाजसेवी विनोद विश्वकर्मा, किड्जी स्कूल की निदेशक ब्यूटी सिंह, मनोज सिंह, विशाल सिंह, शशि कुमार आदि ने शोक संवेदना प्रकट किया है।

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